स्वाइन फ्लू के संक्रमण का खतरा देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया


नोएडा। स्वाइन फ्लू के संक्रमण का खतरा देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जिला अस्पताल सहित सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों और निजी अस्पतालों को इसके इलाज की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिये हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी  डॉ. अनुराग भार्गव  ने  बताया- सर्दी बढ़नी शुरू हो गई है। ऐसे में स्वाइन-फ्लू का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इससे बचाव के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की दवा रखने और अलग से वार्ड बनाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही निजी अस्पतालों को स्वाइन फ्लू का मरीज आने पर स्वास्थ्य विभाग को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
एसीएमओ एवं विभाग के नोडल अधिकारी डा. सुनील दोहरे ने बताया सभी सरकारी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बनाने और अस्पतालों में तैनात डॉक्टर्स और अन्य स्टाफ को एंटी स्वाइन फ्लू वैक्सीन दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही विभिन्न पोस्टर-बैनर व अन्य प्रचार माध्यम से लोगों में जागरूकता लाने के प्रयास शुरू किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में टेमी फ्लू और मास्क उपलब्ध हैं। इन्हें सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
डा. दोहरे ने बताया सभी निजी अस्पतालों को इलाज संबंधी गाइडलाइन भेज दी गयीं हैं। उनसे कहा गया कि किसी भी मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने पर वह नाक और थ्रोट स्वेब का सैंपल स्वास्थ्य विभाग में जरूर भेजें। विभाग उसे जांच के लिए सरकारी लैब में भेजता है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों को निर्देंश दिये गये हैं कि स्वाइन फ्लू को लेकर किसी भी स्थिति में पैनिक  क्रिएट न होने दें। मरीजो का वास्तविक ब्योरा विभाग को उपलब्ध कराएं।
जिला अस्पताल में निशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध
डा. दोहरे ने बताया सरकारी जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू के इलाज की सुविधा व दवा उपलब्ध है। यहां मरीजों की जांच व इलाज मुफ्त किया जाता है।
 
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डा. संतराम वर्मा ने बताया स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है। यह एच1एन1 वायरस के संक्रमण से होती है। स्वाइन फ्लू आम बुखार या सर्दी-जुकाम की तरह होता है। इसका संक्रमण मरीज के खांसने, छींकने और सांस के जरिए फैलता है। स्वाइन फ्लू के सबसे अधिक मामले दिसम्बर से अप्रैल तक आते हैं लेकिन, इस रोग से डरने के बजाय समय पर इससे बचाव के तरीकों को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोग यदि सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का प्रयोग करें तो इसका संक्रमण काफी हद तक रोका जा सकता है। स्वाइन फ्लू के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के नाक और थ्रोट स्वेब का सैंपल माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजा जाता है। एलाइजा जांच के बाद पता चलता है कि स्वाइन फ्लू है या नहीं।
 
स्वाइन फ्लू के लक्षण-



  • तेज बुखार।

  • नाक बहना।

  • खांसी, गले में खराश।

  •  सांस लेने में  परेशानी।

  • सिरदर्द और बदन दर्द।

  • तेज ठंड लगना।

  • आंखें लाल होना और पानी आना।

  • उल्टी, दस्त होना।
     
    स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय-
     

  • खांसते और छींकते समय मुंह को ढक लें।

  • हाथों को साबुन से अच्छे से धोएं।

  • स्वाइन फ्लू के लक्षण हों तो मास्क पहनें।

  • घर से बाहर निकलने से बचें।

  • स्वाइन फ्लू पीड़ित के संपर्क में आने से बचें।

  • ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं और पौष्टिक भोजन लें।
     
    न करें यह काम-
     
    हाथ मिलाना। 
    गले मिलना।
    बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना।
    सार्वजनिक स्थानों पर थूकना।



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